QURANACADEMY
क़ुरआन क़ुरआन हिफ़्ज़इंटरैक्टिव पाठसहायता

सूरह 37 As-Saffat (Standing in rows), आयत 65

  1. طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ

    Its emerging fruit as if it was heads of the devils.

    37:65

अनुवाद: Saheeh International

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