QURANACADEMY
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सूरह 36 Ya-Sin (Ya Sin), आयत 25

  1. إِنِّي آمَنْتُ بِرَبِّكُمْ فَاسْمَعُونِ

    Indeed, I have believed in your Lord, so listen to me."

    36:25

अनुवाद: Saheeh International

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