QURANACADEMY
क़ुरआन क़ुरआन हिफ़्ज़इंटरैक्टिव पाठसहायता

सूरह 26 Ash-Shu'ara' (The Poets), आयत 80

  1. وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ

    And when I am ill, it is He who cures me

    26:80

अनुवाद: Saheeh International

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