QURANACADEMY
क़ुरआन क़ुरआन हिफ़्ज़इंटरैक्टिव पाठसहायता

सूरह 26 Ash-Shu'ara' (The Poets), आयत 209

  1. ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ

    As a reminder; and never have We been unjust.

    26:209

अनुवाद: Saheeh International

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