QURANACADEMY
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सूरह 26 Ash-Shu'ara' (The Poets), आयत 157

  1. فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ

    But they hamstrung her and so became regretful.

    26:157

अनुवाद: Saheeh International

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