सूरह 97 अल्-क़द्र, आयत 1 – 3

  1. إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ

    निःसंदेह हमने इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात (महिमा वाली रात) में उतारा।

    97:1
  2. وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ

    और आपको क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?

    97:2
  3. لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ

    क़द्र की रात हज़ार महीनों से उत्तम है।

    97:3

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari