सूरह 91 अश्-शम्स, आयत 7 – 8

  1. وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا

    और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।

    91:7
  2. فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا

    फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।

    91:8

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी