सूरह 91 अश्-शम्स, आयत 1 – 10

  1. وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا

    सूरज की क़सम! तथा उसके ऊपर चढ़ने के समय की क़सम!

    91:1
  2. وَالْقَمَرِ إِذَا تَلَاهَا

    तथा चाँद की (क़सम), जब वह सूरज के पीछे आए।

    91:2
  3. وَالنَّهَارِ إِذَا جَلَّاهَا

    और दिन की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को प्रकट कर दे!

    91:3
  4. وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَاهَا

    और रात की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को ढाँप ले।

    91:4
  5. وَالسَّمَاءِ وَمَا بَنَاهَا

    और आकाश की तथा उसके निर्माण की (क़सम)।

    91:5
  6. وَالْأَرْضِ وَمَا طَحَاهَا

    और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)

    91:6
  7. وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّاهَا

    और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।

    91:7
  8. فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَاهَا

    फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।

    91:8
  9. قَدْ أَفْلَحَ مَنْ زَكَّاهَا

    निश्चय वह सफल हो गया, जिसने उसे पवित्र कर लिया।

    91:9
  10. وَقَدْ خَابَ مَنْ دَسَّاهَا

    तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।

    91:10

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी