सूरह 89 अल्-फ़ज्र, आयत 1 – 9
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وَالْفَجْرِ
क़सम है फ़ज्र (उषाकाल) की!
89:1 -
وَلَيَالٍ عَشْرٍ
तथा दस रातों की!
89:2 -
وَالشَّفْعِ وَالْوَتْرِ
और सम (जोड़े) और विषम (अकेले) की!
89:3 -
وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
और रात की, जब वह चलती है!
89:4 -
هَلْ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٌ لِذِي حِجْرٍ
निश्चय इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी क़सम है?
89:5 -
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे पालनहार ने "आद" के साथ किस तरह किया?
89:6 -
إِرَمَ ذَاتِ الْعِمَادِ
(वे आद) जो स्तंभों वाले 'इरम' (गोत्र के लोग) थे।
89:7 -
الَّتِي لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِي الْبِلَادِ
जिनके समान (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा नहीं किया गया।
89:8 -
وَثَمُودَ الَّذِينَ جَابُوا الصَّخْرَ بِالْوَادِ
तथा 'समूद' के साथ (किस तरह किया) जिन्होंने वादी में चट्टानों को तराशा।
89:9
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी