सूरह 87 अल्-आला, आयत 9 – 19
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فَذَكِّرْ إِنْ نَفَعَتِ الذِّكْرَىٰ
तो आप नसीहत करते रहें। अगर नसीहत करना लाभदायक हो।
87:9 -
سَيَذَّكَّرُ مَنْ يَخْشَىٰ
वह व्यक्ति उपदेश ग्रहण करेगा, जो डरता है।
87:10 -
وَيَتَجَنَّبُهَا الْأَشْقَى
और उससे दूर रहेगा, जो सबसे बड़ा अभागा है।
87:11 -
الَّذِي يَصْلَى النَّارَ الْكُبْرَىٰ
जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करेगा।
87:12 -
ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।
87:13 -
قَدْ أَفْلَحَ مَنْ تَزَكَّىٰ
निश्चय वह सफल हो गया, जो पाक हो गया।
87:14 -
وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ فَصَلَّىٰ
तथा अपने पालनहार के नाम को याद किया और नमाज़ पढ़ी।
87:15 -
بَلْ تُؤْثِرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
बल्कि तुम सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।
87:16 -
وَالْآخِرَةُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
हालाँकि आख़िरत बहुत उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाली है।
87:17 -
إِنَّ هَٰذَا لَفِي الصُّحُفِ الْأُولَىٰ
निःसंदेह यह बात पहले सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में है।
87:18 -
صُحُفِ إِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ
इबराहीम तथा मूसा के सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में।
87:19
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी