सूरह 84 अल्-इन्शिक़ाक़, आयत 1 – 12
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إِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ
जब आकाश फट जाएगा।
84:1 -
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।
84:2 -
وَإِذَا الْأَرْضُ مُدَّتْ
तथा जब धरती फैला दी जाएगी।
84:3 -
وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ
और जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।
84:4 -
وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ
और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।
84:5 -
يَا أَيُّهَا الْإِنْسَانُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَاقِيهِ
ऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।
84:6 -
فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ
फिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।
84:7 -
فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًا
तो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।
84:8 -
وَيَنْقَلِبُ إِلَىٰ أَهْلِهِ مَسْرُورًا
तथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।
84:9 -
وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ وَرَاءَ ظَهْرِهِ
और लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।
84:10 -
فَسَوْفَ يَدْعُو ثُبُورًا
तो वह विनाश को पुकारेगा।
84:11 -
وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا
तथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।
84:12
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी