सूरह 79 अन्-नाज़िआ़त, आयत 1 – 14

  1. وَالنَّازِعَاتِ غَرْقًا

    क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!

    79:1
  2. وَالنَّاشِطَاتِ نَشْطًا

    और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!

    79:2
  3. وَالسَّابِحَاتِ سَبْحًا

    और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!

    79:3
  4. فَالسَّابِقَاتِ سَبْقًا

    फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!

    79:4
  5. فَالْمُدَبِّرَاتِ أَمْرًا

    फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं!

    79:5
  6. يَوْمَ تَرْجُفُ الرَّاجِفَةُ

    जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।

    79:6
  7. تَتْبَعُهَا الرَّادِفَةُ

    उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।

    79:7
  8. قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ

    उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।

    79:8
  9. أَبْصَارُهَا خَاشِعَةٌ

    उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।

    79:9
  10. يَقُولُونَ أَإِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِي الْحَافِرَةِ

    वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?

    79:10
  11. أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا نَخِرَةً

    क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?

    79:11
  12. قَالُوا تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ

    उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।

    79:12
  13. فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ

    वह तो केवल एक डाँट होगी।

    79:13
  14. فَإِذَا هُمْ بِالسَّاهِرَةِ

    फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।

    79:14

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी