सूरह 75 अल्-क़ियामह, आयत 36 – 40

  1. أَيَحْسَبُ الْإِنْسَانُ أَنْ يُتْرَكَ سُدًى

    क्या इनसान समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जायेगा?

    75:36
  2. أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِنْ مَنِيٍّ يُمْنَىٰ

    क्या वह वीर्य की एक बूंद नहीं था, जो (गर्भाशय में) गिराई जाती है?

    75:37
  3. ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ

    फिर वह जमे हुए रक्त का टुकड़ा हुआ, फिर अल्लाह ने पैदा किया और दुरुस्त बनाया।

    75:38
  4. فَجَعَلَ مِنْهُ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْأُنْثَىٰ

    फिर उसने उससे दो प्रकार : नर और मादा बनाए।

    75:39
  5. أَلَيْسَ ذَٰلِكَ بِقَادِرٍ عَلَىٰ أَنْ يُحْيِيَ الْمَوْتَىٰ

    क्या वह इसमें समर्थ नहीं कि मुर्दों को जीवित कर दे?

    75:40

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari