सूरह 74 अल्-मुद्दस्सिर, आयत 1 – 10
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يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ
ऐ कपड़े में लिपटने वाले!
74:1 -
قُمْ فَأَنْذِرْ
खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।
74:2 -
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ
तथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।
74:3 -
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ
तथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।
74:4 -
وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ
और गंदगी (बुतों) से दूर रहो।
74:5 -
وَلَا تَمْنُنْ تَسْتَكْثِرُ
तथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।
74:6 -
وَلِرَبِّكَ فَاصْبِرْ
और अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।
74:7 -
فَإِذَا نُقِرَ فِي النَّاقُورِ
फिर जब सूर में फूँक मारी जाएगी।
74:8 -
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ
तो वह दिन अति भीषण दिन होगा।
74:9 -
عَلَى الْكَافِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ
काफ़िरों पर आसान न होगा।
74:10
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी