सूरह 72 अल्-जिन्न, आयत 14 – 15

  1. وَأَنَّا مِنَّا الْمُسْلِمُونَ وَمِنَّا الْقَاسِطُونَ ۖ فَمَنْ أَسْلَمَ فَأُولَٰئِكَ تَحَرَّوْا رَشَدًا

    और यह कि हममें से कुछ आज्ञाकारी हैं और हममें से कुछ अत्याचारी हैं। फिर जो आज्ञाकारी हो गया, तो वही लोग हैं जिन्होंने सीधा रास्ता खोजा।

    72:14
  2. وَأَمَّا الْقَاسِطُونَ فَكَانُوا لِجَهَنَّمَ حَطَبًا

    तथा जो अत्याचारी हैं, तो वे जहन्नम का ईंधन होंगे।

    72:15

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari