सूरह 70 अल्-मआ़रिज, आयत 22 – 35
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إِلَّا الْمُصَلِّينَ
सिवाय नमाज़ियों के।
70:22 -
الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ
जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।
70:23 -
وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَعْلُومٌ
और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।
70:24 -
لِلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
माँगने वाले तथा वंचित के लिए।
70:25 -
وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।
70:26 -
وَالَّذِينَ هُمْ مِنْ عَذَابِ رَبِّهِمْ مُشْفِقُونَ
और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।
70:27 -
إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ
निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।
70:28 -
وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।
70:29 -
إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।
70:30 -
فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
70:31 -
وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
70:32 -
وَالَّذِينَ هُمْ بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ
और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।
70:33 -
وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।
70:34 -
أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُكْرَمُونَ
वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।
70:35
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी