सूरह 70 अल्-मआ़रिज, आयत 1 – 9

  1. سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ

    एक माँगने वाले ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।

    70:1
  2. لِلْكَافِرِينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌ

    काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।

    70:2
  3. مِنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ

    ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।

    70:3
  4. تَعْرُجُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ

    फ़रिश्ते और रूह उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।

    70:4
  5. فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا

    अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।

    70:5
  6. إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُ بَعِيدًا

    निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।

    70:6
  7. وَنَرَاهُ قَرِيبًا

    और हम उसे निकट देख रहे हैं।

    70:7
  8. يَوْمَ تَكُونُ السَّمَاءُ كَالْمُهْلِ

    जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।

    70:8
  9. وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ

    और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।

    70:9

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी