सूरह 69 अल्-ह़ाक़्क़ा, आयत 6 – 8

  1. وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ

    और रही बात आद की, तो वे बड़ी ठंडी और प्रचंड आँधी से नष्ट कर दिए गए।

    69:6
  2. سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ

    अल्लाह ने उसे उनपर सात रातें और आठ दिन निरंतर चलाए रखा, तो आप उस जाति के लोगों को उसमें इस तरह गिरे हुए देखते, जैसे वे गिरी हुई खजूरों के खोखले तने हों।

    69:7
  3. فَهَلْ تَرَىٰ لَهُمْ مِنْ بَاقِيَةٍ

    तो क्या आप उनका कोई भी बाक़ी रहने वाला देखते हैं?

    69:8

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी