सूरह 69 अल्-ह़ाक़्क़ा, आयत 41 – 46
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وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَا تُؤْمِنُونَ
और यह किसी कवि की वाणी नहीं है। तुम बहुत कम ईमान लाते हो।
69:41 -
وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَا تَذَكَّرُونَ
और न किसी काहिन की वाणी है, तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो।
69:42 -
تَنْزِيلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَمِينَ
(यह) सर्व संसार के पालनहार की ओर से उतारा हुआ है।
69:43 -
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ
और यदि वह (नबी) हमपर कोई बात बनाकर लगाता।
69:44 -
لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ
तो निश्चय हम उसे दाएँ हाथ से पकते।
69:45 -
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ
फिर अवश्य हम उसके जीवन की धमनी काट देते।
69:46
अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari