सूरह 68 अल्-क़लम, आयत 1 – 10
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ن ۚ وَالْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ
नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी जो वे लिखते हैं।
68:1 -
مَا أَنْتَ بِنِعْمَةِ رَبِّكَ بِمَجْنُونٍ
आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
68:2 -
وَإِنَّ لَكَ لَأَجْرًا غَيْرَ مَمْنُونٍ
तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
68:3 -
وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍ
तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
68:4 -
فَسَتُبْصِرُ وَيُبْصِرُونَ
अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
68:5 -
بِأَيْيِكُمُ الْمَفْتُونُ
कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
68:6 -
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ
निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
68:7 -
فَلَا تُطِعِ الْمُكَذِّبِينَ
अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
68:8 -
وَدُّوا لَوْ تُدْهِنُ فَيُدْهِنُونَ
वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी करें।
68:9 -
وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍ مَهِينٍ
और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।
68:10
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी