सूरह 61 अस्-सफ़्फ़, आयत 2 – 3

  1. يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لِمَ تَقُولُونَ مَا لَا تَفْعَلُونَ

    ऐ ईमान वालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं?

    61:2
  2. كَبُرَ مَقْتًا عِنْدَ اللَّهِ أَنْ تَقُولُوا مَا لَا تَفْعَلُونَ

    अल्लाह को अत्यंत अप्रिय है कि तुम वह बात कहो, जो तुम करते नहीं।

    61:3

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी