सूरह 56 अल्-वाक़िआ़, आयत 1 – 14
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إِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ
जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।
56:1 -
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ
उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।
56:2 -
خَافِضَةٌ رَافِعَةٌ
नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।
56:3 -
إِذَا رُجَّتِ الْأَرْضُ رَجًّا
जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।
56:4 -
وَبُسَّتِ الْجِبَالُ بَسًّا
और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।
56:5 -
فَكَانَتْ هَبَاءً مُنْبَثًّا
तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।
56:6 -
وَكُنْتُمْ أَزْوَاجًا ثَلَاثَةً
और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
56:7 -
فَأَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ
तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!
56:8 -
وَأَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ
और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!
56:9 -
وَالسَّابِقُونَ السَّابِقُونَ
और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।
56:10 -
أُولَٰئِكَ الْمُقَرَّبُونَ
यही लोग निकट किए हुए हैं।
56:11 -
فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
नेमत के बाग़ों में।
56:12 -
ثُلَّةٌ مِنَ الْأَوَّلِينَ
पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।
56:13 -
وَقَلِيلٌ مِنَ الْآخِرِينَ
तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।
56:14
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी