सूरह 53 अन्-नज्म, आयत 6 – 18

  1. ذُو مِرَّةٍ فَاسْتَوَىٰ

    जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

    53:6
  2. وَهُوَ بِالْأُفُقِ الْأَعْلَىٰ

    जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

    53:7
  3. ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ

    फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

    53:8
  4. فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ

    फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

    53:9
  5. فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ

    फिर उसने अल्लाह के बंदे की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

    53:10
  6. مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ

    दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

    53:11
  7. أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ

    फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

    53:12
  8. وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ

    हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

    53:13
  9. عِنْدَ سِدْرَةِ الْمُنْتَهَىٰ

    सिदरतुल-मुनतहा' के पास।

    53:14
  10. عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ

    उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

    53:15
  11. إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ

    जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।

    53:16
  12. مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ

    न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

    53:17
  13. لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ

    निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ देखीं।

    53:18

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी