सूरह 53 अन्-नज्म, आयत 12 – 18

  1. أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ

    फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

    53:12
  2. وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ

    हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

    53:13
  3. عِنْدَ سِدْرَةِ الْمُنْتَهَىٰ

    सिदरतुल-मुनतहा' के पास।

    53:14
  4. عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ

    उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

    53:15
  5. إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ

    जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।

    53:16
  6. مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ

    न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

    53:17
  7. لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ

    निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ देखीं।

    53:18

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari