सूरह 53 अन्-नज्म, आयत 1 – 18

  1. وَالنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ

    क़सम है तारे की जब वह गिरे!

    53:1
  2. مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ

    तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।

    53:2
  3. وَمَا يَنْطِقُ عَنِ الْهَوَىٰ

    और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।

    53:3
  4. إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْيٌ يُوحَىٰ

    वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।

    53:4
  5. عَلَّمَهُ شَدِيدُ الْقُوَىٰ

    उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते) ने सिखाया है।

    53:5
  6. ذُو مِرَّةٍ فَاسْتَوَىٰ

    जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

    53:6
  7. وَهُوَ بِالْأُفُقِ الْأَعْلَىٰ

    जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

    53:7
  8. ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ

    फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

    53:8
  9. فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ

    फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

    53:9
  10. فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ

    फिर उसने अल्लाह के बंदे की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

    53:10
  11. مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ

    दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

    53:11
  12. أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ

    फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

    53:12
  13. وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ

    हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

    53:13
  14. عِنْدَ سِدْرَةِ الْمُنْتَهَىٰ

    सिदरतुल-मुनतहा' के पास।

    53:14
  15. عِنْدَهَا جَنَّةُ الْمَأْوَىٰ

    उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

    53:15
  16. إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ

    जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।

    53:16
  17. مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ

    न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

    53:17
  18. لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ

    निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ देखीं।

    53:18

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी