सूरह 53 अन्-नज्म, आयत 1 – 12
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وَالنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ
क़सम है तारे की जब वह गिरे!
53:1 -
مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ
तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।
53:2 -
وَمَا يَنْطِقُ عَنِ الْهَوَىٰ
और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।
53:3 -
إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْيٌ يُوحَىٰ
वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।
53:4 -
عَلَّمَهُ شَدِيدُ الْقُوَىٰ
उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते) ने सिखाया है।
53:5 -
ذُو مِرَّةٍ فَاسْتَوَىٰ
जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।
53:6 -
وَهُوَ بِالْأُفُقِ الْأَعْلَىٰ
जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।
53:7 -
ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ
फिर वह निकट हुआ और उतर आया।
53:8 -
فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ
फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।
53:9 -
فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ
फिर उसने अल्लाह के बंदे की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।
53:10 -
مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ
दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।
53:11 -
أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ
फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?
53:12
अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari