सूरह 52 अत्-तूर, आयत 1 – 28

  1. وَالطُّورِ

    क़सम है तूर (पर्वत) की!

    52:1
  2. وَكِتَابٍ مَسْطُورٍ

    और एक पुस्तक की जो लिखी हुई है!

    52:2
  3. فِي رَقٍّ مَنْشُورٍ

    ऐसे पन्ने में जो खुला हुआ है।

    52:3
  4. وَالْبَيْتِ الْمَعْمُورِ

    तथा बैतुल-मा'मूर (आबाद घर) की!

    52:4
  5. وَالسَّقْفِ الْمَرْفُوعِ

    तथा ऊँची उठाई हुई छत (आकाश) की!

    52:5
  6. وَالْبَحْرِ الْمَسْجُورِ

    और लबालब भरे हुए समुद्र की!

    52:6
  7. إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَاقِعٌ

    कि निश्चय आपके पालनहार की यातना अवश्चय घटित होने वाली है।

    52:7
  8. مَا لَهُ مِنْ دَافِعٍ

    उसे कोई टालने वाला नहीं।

    52:8
  9. يَوْمَ تَمُورُ السَّمَاءُ مَوْرًا

    जिस दिन आकाश बुरी तरह डगमगाएगा।

    52:9
  10. وَتَسِيرُ الْجِبَالُ سَيْرًا

    तथा पर्वत बहुत तेज़ी से चलेंगे।

    52:10
  11. فَوَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِلْمُكَذِّبِينَ

    तो उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ी तबाही है।

    52:11
  12. الَّذِينَ هُمْ فِي خَوْضٍ يَلْعَبُونَ

    जो व्यर्थ बातों में पड़े खेल रहे हैं।

    52:12
  13. يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا

    जिस दिन उन्हें ज़ोर से धक्का देकर जहन्नम की आग में धकेला जाएगा।

    52:13
  14. هَٰذِهِ النَّارُ الَّتِي كُنْتُمْ بِهَا تُكَذِّبُونَ

    यही है वह आग, जिसे तुम झुठलाते थे।

    52:14
  15. أَفَسِحْرٌ هَٰذَا أَمْ أَنْتُمْ لَا تُبْصِرُونَ

    तो क्या यह जादू है, या तुम नहीं देख रहे?

    52:15
  16. اصْلَوْهَا فَاصْبِرُوا أَوْ لَا تَصْبِرُوا سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ

    इसमें प्रवेश कर जाओ। फिर सब्र करो या सब्र न करो, तुम्हारे लिए बराबर है। तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

    52:16
  17. إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَعِيمٍ

    निःसंदेह डरने वाले लोग बागों और बड़ी नेमत में हैं।

    52:17
  18. فَاكِهِينَ بِمَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَاهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ

    उसका आनंद लेने वाले हैं जो उनके रब ने उन्हें दिया और उनके रब ने उन्हें दहकती हुई आग की यातना से बचा लिया।

    52:18
  19. كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ

    मज़े से खाओ और पियो, उसके बदले जो तुम किया करते थे।

    52:19
  20. مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ سُرُرٍ مَصْفُوفَةٍ ۖ وَزَوَّجْنَاهُمْ بِحُورٍ عِينٍ

    पंक्तिबद्ध तख़्तों पर तकिया लगाए हुए होंगे और हमने उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर दिया, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली हैं।

    52:20
  21. وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُمْ بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَا أَلَتْنَاهُمْ مِنْ عَمَلِهِمْ مِنْ شَيْءٍ ۚ كُلُّ امْرِئٍ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ

    और जो लोग ईमान लाए और उनकी संतान ने ईमान के साथ उनका अनुसरण किया, हम उनकी संतान को उनके साथ मिला देंगे तथा उनके कर्मों में उनसे कुछ भी कम न करेंगे। प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले में जो उसने कमाया, गिरवी रखा हुआ है।

    52:21
  22. وَأَمْدَدْنَاهُمْ بِفَاكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِمَّا يَشْتَهُونَ

    तथा हम उन्हें और अधिक फल और मांस देंगे उसमें से जो वे चाहेंगे।

    52:22
  23. يَتَنَازَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ

    वे उसमें एक-दूसरे से मदिरा का प्याला लेंगे, जिसमें न कोई व्यर्थ बात होगी और न गुनाह में डालना।

    52:23
  24. وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَكْنُونٌ

    तथा उनके आस-पास चक्कर लगाते रहेंगे उन्हीं के बच्चे, जैसे वे छुपाए हुए मोती हों।

    52:24
  25. وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ

    और वे एक-दूसरे की ओर मुतवज्जह होकर आपस में सवाल करेंगे।

    52:25
  26. قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ

    वे कहेंगे : निःसंदेह हम इससे पहले अपने घरवालों में डरने वाले थे।

    52:26
  27. فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ

    तो अल्लाह ने हमपर उपकार किया और हमें विषैली लू की यातना से बचा लिया।

    52:27
  28. إِنَّا كُنَّا مِنْ قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ

    निःसंदेह हम इससे पहले ही उसे पुकारा करते थे। निश्चय वही तो अति परोपकारी, अत्यंत दयावान् है।

    52:28

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी