सूरह 44 अद्-दुख़ान, आयत 43 – 49
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إِنَّ شَجَرَتَ الزَّقُّومِ
निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।
44:43 -
طَعَامُ الْأَثِيمِ
पापी का भोजन है।
44:44 -
كَالْمُهْلِ يَغْلِي فِي الْبُطُونِ
पिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।
44:45 -
كَغَلْيِ الْحَمِيمِ
गर्म पानी के खौलने की तरह।
44:46 -
خُذُوهُ فَاعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَاءِ الْجَحِيمِ
इसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।
44:47 -
ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ
फिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।
44:48 -
ذُقْ إِنَّكَ أَنْتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ
चख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।
44:49
अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari