सूरह 44 अद्-दुख़ान, आयत 15 – 36
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إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ
निःसंदेह हम इस यातना को थोड़ी देर के लिए दूर करने वाले हैं। (परंतु) निःसंदेह तुम फिर वही कुछ करने वाले हो।
44:15 -
يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنْتَقِمُونَ
जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, निःसंदेह हम बदला लेने वाले हैं।
44:16 -
وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ
तथा निःसंदेह हमने इनसे पूर्व फ़िरऔन की जाति की परीक्षा ली तथा उनके पास एक अति सम्मानित रसूल आया।
44:17 -
أَنْ أَدُّوا إِلَيَّ عِبَادَ اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
यह कि अल्लाह के बंदों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।
44:18 -
وَأَنْ لَا تَعْلُوا عَلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي آتِيكُمْ بِسُلْطَانٍ مُبِينٍ
तथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।
44:19 -
وَإِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمْ أَنْ تَرْجُمُونِ
तथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।
44:20 -
وَإِنْ لَمْ تُؤْمِنُوا لِي فَاعْتَزِلُونِ
और अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।
44:21 -
فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُجْرِمُونَ
अंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।
44:22 -
فَأَسْرِ بِعِبَادِي لَيْلًا إِنَّكُمْ مُتَّبَعُونَ
अतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।
44:23 -
وَاتْرُكِ الْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُنْدٌ مُغْرَقُونَ
तथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।
44:24 -
كَمْ تَرَكُوا مِنْ جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
वे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।
44:25 -
وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ
तथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।
44:26 -
وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ
तथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।
44:27 -
كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ
ऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे लोगों को बना दिया।
44:28 -
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنْظَرِينَ
फिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।
44:29 -
وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مِنَ الْعَذَابِ الْمُهِينِ
तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।
44:30 -
مِنْ فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِنَ الْمُسْرِفِينَ
फ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।
44:31 -
وَلَقَدِ اخْتَرْنَاهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
तथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।
44:32 -
وَآتَيْنَاهُمْ مِنَ الْآيَاتِ مَا فِيهِ بَلَاءٌ مُبِينٌ
तथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।
44:33 -
إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَيَقُولُونَ
निःसंदेह ये लोग निश्चय कहते हैं।
44:34 -
إِنْ هِيَ إِلَّا مَوْتَتُنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنْشَرِينَ
कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।
44:35 -
فَأْتُوا بِآبَائِنَا إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ
तो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?
44:36
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी