सूरह 44 अद्-दुख़ान, आयत 1 – 8

  1. حم

    ह़ा, मीम।

    44:1
  2. وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ

    क़सम है स्पष्ट करने वाली पुस्तक की।

    44:2
  3. إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنْذِرِينَ

    निःसंदेह हमने इसे एक बरकत वाली रात में उतारा है। निःसंदेह हम डराने वाले थे।

    44:3
  4. فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ

    इसी (रात) में प्रत्येक अटल मामले का निर्णय किया जाता है।

    44:4
  5. أَمْرًا مِنْ عِنْدِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ

    हमारी ओर से आदेश के कारण। निःसंदेह हम ही भेजने वाले थे।

    44:5
  6. رَحْمَةً مِنْ رَبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

    आपके पालनहार की दया के कारण। निश्चय वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

    44:6
  7. رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِنْ كُنْتُمْ مُوقِنِينَ

    जो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।

    44:7
  8. لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ

    उसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं। वही जीवित करता और मारता है। तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पहले बाप-दादाओं का पालनहार है।

    44:8

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari