सूरह 41 फ़ुस्सिलत, आयत 1 – 4

  1. حم

    ह़ा, मीम।

    41:1
  2. تَنْزِيلٌ مِنَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

    (यह कुरआन) अत्यंत दयावान्, असीम दयालु की ओर से अवतरित हुआ है।

    41:2
  3. كِتَابٌ فُصِّلَتْ آيَاتُهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ

    (यह ऐसी) पुस्तक है, जिसकी आयतें खोलकर बयान की गई हैं। (यह) क़ुरआन अरबी (भाषा में) है, उन लोगों के लिए जो ज्ञान रखते हैं।

    41:3
  4. بَشِيرًا وَنَذِيرًا فَأَعْرَضَ أَكْثَرُهُمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَ

    वह शुभ सूचना देने वाला तथा सचेत करने वाला है। लेकिन उनमें से अधिकतर ने (उससे) मुँह फेर लिया, तो वे सुनते ही नहीं।

    41:4

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी