सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 75 – 79

  1. وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ

    तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।

    37:75
  2. وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ

    और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।

    37:76
  3. وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ

    तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला बना दिया।

    37:77
  4. وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

    37:78
  5. سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ

    सर्व संसार में नूह़ पर सलाम हो।

    37:79

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी