सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 75 – 79
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وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।
37:75 -
وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।
37:76 -
وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला बना दिया।
37:77 -
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
37:78 -
سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
सर्व संसार में नूह़ पर सलाम हो।
37:79
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी