सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 167 – 170

  1. وَإِنْ كَانُوا لَيَقُولُونَ

    तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे

    37:167
  2. لَوْ أَنَّ عِنْدَنَا ذِكْرًا مِنَ الْأَوَّلِينَ

    यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,

    37:168
  3. لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ

    तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।

    37:169
  4. فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ

    (फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।

    37:170

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी