सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 167 – 170
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وَإِنْ كَانُوا لَيَقُولُونَ
तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे
37:167 -
لَوْ أَنَّ عِنْدَنَا ذِكْرًا مِنَ الْأَوَّلِينَ
यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,
37:168 -
لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।
37:169 -
فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
(फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।
37:170
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी