सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 133 – 138
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وَإِنَّ لُوطًا لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।
37:133 -
إِذْ نَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ
जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।
37:134 -
إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
सिवाय एक बुढ़िया के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।
37:135 -
ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।
37:136 -
وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِمْ مُصْبِحِينَ
तथा निःसंदेह तुम निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।
37:137 -
وَبِاللَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?
37:138
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी