सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 104 – 107

  1. وَنَادَيْنَاهُ أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ

    और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!

    37:104
  2. قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ

    निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

    37:105
  3. إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ

    निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।

    37:106
  4. وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ

    और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा दिया।

    37:107

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari