सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 103 – 106
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فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ
अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।
37:103 -
وَنَادَيْنَاهُ أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ
और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!
37:104 -
قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
37:105 -
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ
निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।
37:106
अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari