सूरह 37 अस्-साफ़्फ़ात, आयत 100 – 108

  1. رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ

    ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।

    37:100
  2. فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ

    तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।

    37:101
  3. فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانْظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِنْ شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ

    फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।

    37:102
  4. فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ

    अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।

    37:103
  5. وَنَادَيْنَاهُ أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ

    और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!

    37:104
  6. قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ

    निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

    37:105
  7. إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ

    निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।

    37:106
  8. وَفَدَيْنَاهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ

    और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा दिया।

    37:107
  9. وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ

    और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

    37:108

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari