सूरह 36 यासीन, आयत 1 – 11
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يس
या, सीन।
36:1 -
وَالْقُرْآنِ الْحَكِيمِ
क़सम है हिकमत वाले क़ुरआन की!
36:2 -
إِنَّكَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
निःसंदेह आप रसूलों में से हैं।
36:3 -
عَلَىٰ صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ
सीधे रास्ते पर हैं।
36:4 -
تَنْزِيلَ الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ
(यह) प्रभुत्वशाली, अति दयावान् (अल्लाह) का उतारा हुआ है।
36:5 -
لِتُنْذِرَ قَوْمًا مَا أُنْذِرَ آبَاؤُهُمْ فَهُمْ غَافِلُونَ
ताकि आप उस जाति को डराएँ, जिनके बााप-दादा नहीं डराए गए थे। इसलिए वे ग़ाफ़िल हैं।
36:6 -
لَقَدْ حَقَّ الْقَوْلُ عَلَىٰ أَكْثَرِهِمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
उनमें से अधिकतर लोगों पर बात सिद्ध हो चुकी है। अतः वे ईमान नहीं लाएँगे।
36:7 -
إِنَّا جَعَلْنَا فِي أَعْنَاقِهِمْ أَغْلَالًا فَهِيَ إِلَى الْأَذْقَانِ فَهُمْ مُقْمَحُونَ
तथा हमने उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों से लगे हैं। इसलिए वे सिर ऊपर किए हुए हैं।
36:8 -
وَجَعَلْنَا مِنْ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
तथा हमने उनके आगे एक आड़ बना दी है और उनके पीछे एक आड़। फिर हमने उनको ढाँक दिया है। अतः वे देख ही नहीं पाते।
36:9 -
وَسَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنْذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنْذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएँ या न डराएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे।
36:10 -
إِنَّمَا تُنْذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
आप तो केवल उस व्यक्ति को डरा सकते हैं, जो इस ज़िक्र (क़ुरआन) का पालन करे, तथा बिन देखे रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) से डरे। तो आप उसे क्षमा तथा सम्मानजनक बदले की शुभ सूचना दे दें।
36:11
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी