सूरह 27 अन्-नम्ल, आयत 1 – 5

  1. طس ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْقُرْآنِ وَكِتَابٍ مُبِينٍ

    ता, सीन। ये क़ुरआन तथा स्पष्ट पुस्तक की आयतें हैं।

    27:1
  2. هُدًى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ

    ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन तथा शुभ-सूचना हैं।

    27:2
  3. الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُمْ بِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ

    जो नमाज़ स्थापित करते तथा ज़कात देते हैं और वही हैं, जो आख़िरत (परलोक) पर विश्वास रखते हैं।

    27:3
  4. إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَالَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَ

    निःसंदेह जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके कर्मों को उनके लिए सुंदर बना दिया है। अतः वे भटकते फिरते है।

    27:4
  5. أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَهُمْ سُوءُ الْعَذَابِ وَهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ

    यही लोग हैं, जिनके लिए बुरी यातना है तथा आख़िरत में यही सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।

    27:5

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी