सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 224 – 227

  1. وَالشُّعَرَاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُونَ

    और कवि लोग, उनके पीछे भटके हुए लोग ही चलते हैं।

    26:224
  2. أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِي كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ

    क्या आपने नहीं देखा कि वे प्रत्येक वादी में भटकते फिरते हैं।

    26:225
  3. وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ

    और यह कि निःसंदेह ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।

    26:226
  4. إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَذَكَرُوا اللَّهَ كَثِيرًا وَانْتَصَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا ۗ وَسَيَعْلَمُ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَيَّ مُنْقَلَبٍ يَنْقَلِبُونَ

    सिवाय उन (कवियों) के, जो ईमान लाए, और अच्छे कर्म किए और अल्लाह को बहुत याद किया तथा बदला लिया, इसके बाद कि उनके ऊपर ज़ुल्म किया गया। तथा वे लोग, जिन्होंने अत्याचार किया, शीघ्र ही जान लेंगे कि वे किस जगह लौटकर जाएँगे।

    26:227

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari