सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 195 – 199
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بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُبِينٍ
स्पष्ट अरबी भाषा में।
26:195 -
وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ
तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।
26:196 -
أَوَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ آيَةً أَنْ يَعْلَمَهُ عُلَمَاءُ بَنِي إِسْرَائِيلَ
क्या उनके लिए यह एक निशानी न थी है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते हैं।
26:197 -
وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ
और यदि हम इसे ग़ैर-अरब लोगों में से किसी पर उतार देते।
26:198 -
فَقَرَأَهُ عَلَيْهِمْ مَا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ
फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी वे उसपर ईमान लाने वाले न होते।
26:199
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी