सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 161 – 166

  1. إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा : क्या तुम डरते नहीं हो?

    26:161
  2. إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    26:162
  3. فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    26:163
  4. وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    26:164
  5. أَتَأْتُونَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعَالَمِينَ

    क्या सभी संसारों में से तुम पुरुषों के पास आते हो।

    26:165
  6. وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ أَزْوَاجِكُمْ ۚ بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ

    तथा उन्हें छोड़ देते हो, जो तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे लिए तुम्हारी पत्नियाँ पैदा की हैं। बल्कि तुम हद से आगे बढ़ने वाले लोग हो।

    26:166

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी