सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 15 – 17

  1. قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ

    (अल्लाह ने) फरमाया : ऐसा कभी नहीं होगा, अतः तुम दोनों हमारी निशानियों के साथ जाओ। निःसंदेह हम तुम्हारे साथ ख़ूब सुनने वाले हैं।

    26:15
  2. فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَا إِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ

    तो तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ और कहो कि निःसंदेह हम सारे संसारों के पालनहार के संदेशवाहक हैं।

    26:16
  3. أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ

    कि तू बनी इसराईल को हमारे साथ भेज दे।

    26:17

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी