सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 128 – 129

  1. أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ آيَةً تَعْبَثُونَ

    क्या तुम हर ऊँचे स्थान पर एक स्मारक बनाते हो? इस स्थिति में कि व्यर्थ कार्य करते हो।

    26:128
  2. وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ

    तथा बड़े-बड़े भवन बनाते हो, शायद कि तुम सदा जीवित रहोगे।

    26:129

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी