सूरह 26 अश्-शु-अ़-रा, आयत 105 – 122

  1. كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ الْمُرْسَلِينَ

    नूह़ की जाति ने रसूलों को झुठलाया।

    26:105
  2. إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ

    जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहा : क्या तुम डरते नहीं?

    26:106
  3. إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

    निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

    26:107
  4. فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    26:108
  5. وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

    मैं इस (कार्य) पर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता। मेरा बदला तो केवल सारे संसारों के पालनहार पर है।

    26:109
  6. فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

    अतः तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

    26:110
  7. قَالُوا أَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْأَرْذَلُونَ

    उन्होंने कहा : क्या हम तुझपर ईमान ले आएँ, जबकि तेरे पीछे चलने वाले अत्यंत नीच लोग हैं?

    26:111
  8. قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ

    (नूह़ ने) कहा : मूझे क्या मालूम कि वे क्या कर्म करते रहे हैं?

    26:112
  9. إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّي ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ

    उनका ह़िसाब तो मेरे पालनहार ही के ज़िम्मे है, यदि तुम समझो।

    26:113
  10. وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الْمُؤْمِنِينَ

    और मैं ईमान वालों को धुतकारने वाला नहीं हूँ।

    26:114
  11. إِنْ أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُبِينٌ

    मैं तो बस एक खुला डराने वाला हूँ

    26:115
  12. قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ

    उन्होंने कहा : ऐ नूह़! यदि तू बाज़ नहीं आया, तो अवश्य संगसार किए गए लोगों में से हो जाएगा।

    26:116
  13. قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِي كَذَّبُونِ

    उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निःसंदेह मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया!

    26:117
  14. فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَنْ مَعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ

    अतः तू मेरे और उनके बीच दो-टूक निर्णय कर दे, तथा मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ हैं, उन्हें बचा ले।

    26:118
  15. فَأَنْجَيْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ

    तो हमने उसे और उन लोगों को जो उसके साथ भरी हुई नाव में थे, बचा लिया।

    26:119
  16. ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ

    फिर उसके बाद शेष लोगों को डुबो दिया।

    26:120
  17. إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।

    26:121
  18. وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

    और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।

    26:122

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी