सूरह 23 अल्-मुमिनून, आयत 1 – 11
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قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ
निश्चय सफल हो गए ईमान वाले।
23:1 -
الَّذِينَ هُمْ فِي صَلَاتِهِمْ خَاشِعُونَ
जो अपनी नमाज़ में विनम्रता अपनाने वाले हैं।
23:2 -
وَالَّذِينَ هُمْ عَنِ اللَّغْوِ مُعْرِضُونَ
और जो व्यर्थ चीज़ों से मुँह मोड़ने वाले हैं।
23:3 -
وَالَّذِينَ هُمْ لِلزَّكَاةِ فَاعِلُونَ
तथा जो ज़कात अदा करने वाले हैं।
23:4 -
وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।
23:5 -
إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
सिवाय अपनी पत्नियों या उन महिलाओं के जो उनके स्वामित्व में हैं, तो निःसंदेह वे निंदित नहीं हैं।
23:6 -
فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
फिर जो इसके अलावा तलाश करे, तो वही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
23:7 -
وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ
और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।
23:8 -
وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَوَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ
तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।
23:9 -
أُولَٰئِكَ هُمُ الْوَارِثُونَ
यही लोग हैं, जो वारिस (उत्तराधिकारी) हैं।
23:10 -
الَّذِينَ يَرِثُونَ الْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जो फ़िरदौस के वारिस होंगे, वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं।
23:11
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी