सूरह 21 अल्-अम्बिया, आयत 5 – 6
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بَلْ قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ بَلِ افْتَرَاهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌ فَلْيَأْتِنَا بِآيَةٍ كَمَا أُرْسِلَ الْأَوَّلُونَ
बल्कि उन्होंने (क़ुरआन के बारे में) कहा : यह सपनों की उलझी हुई बातें हैं, बल्कि उसने इसे स्वयं गढ़ लिया है, बल्कि वह कवि है! अतः उसे चाहिए कि हमारे पास कोई निशानी लाए, जैसे पहले के रसूल (निशानियों के साथ) भेजे गए थे।
21:5 -
مَا آمَنَتْ قَبْلَهُمْ مِنْ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا ۖ أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ
इनसे पहले कोई बस्ती, जिसे हमने विनष्ट किया, ईमान नहीं लाई। तो क्या ये ईमान ले आएँगे?
21:6
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी