सूरह 20 ताहा, आयत 21 – 24
-
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا الْأُولَىٰ
फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।
20:21 -
وَاضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ آيَةً أُخْرَىٰ
और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।
20:22 -
لِنُرِيَكَ مِنْ آيَاتِنَا الْكُبْرَى
ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।
20:23 -
اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।
20:24
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी