सूरह 18 अल्-कह्फ़, आयत 83 – 102

  1. وَيَسْأَلُونَكَ عَنْ ذِي الْقَرْنَيْنِ ۖ قُلْ سَأَتْلُو عَلَيْكُمْ مِنْهُ ذِكْرًا

    और (ऐ नबी!) वे आपसे ज़ुल-क़रनैन के विषय में प्रश्न करते हैं। आप कह दें : मैं तुम्हें उसका कुछ वृत्तांत पढ़कर सुनाऊँगा।

    18:83
  2. إِنَّا مَكَّنَّا لَهُ فِي الْأَرْضِ وَآتَيْنَاهُ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ سَبَبًا

    हमने उसे धरती में प्रभुत्व प्रदान किया तथा उसे प्रत्येक प्रकार का साधन दिया।

    18:84
  3. فَأَتْبَعَ سَبَبًا

    तो वह कुछ सामान लेकर चला।

    18:85
  4. حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ فِي عَيْنٍ حَمِئَةٍ وَوَجَدَ عِنْدَهَا قَوْمًا ۗ قُلْنَا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ إِمَّا أَنْ تُعَذِّبَ وَإِمَّا أَنْ تَتَّخِذَ فِيهِمْ حُسْنًا

    यहाँ तक कि जब वह सूर्यास्त के स्थान तक पहुँचा, तो उसे पाया कि वह एक काले कीचड़ वाले जलस्रोत में डूब रहा है और उसके पास एक जाति को पाया। हमने कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तू उन्हें यातना दे और या तो तू उनके साथ अच्छा व्यवहार कर।

    18:86
  5. قَالَ أَمَّا مَنْ ظَلَمَ فَسَوْفَ نُعَذِّبُهُ ثُمَّ يُرَدُّ إِلَىٰ رَبِّهِ فَيُعَذِّبُهُ عَذَابًا نُكْرًا

    उसने कहा : जो अत्याचार करेगा, हम उसे शीघ्र दंड देंगे। फिर वह अपने पालनहार की ओर लौटाया जाएगा, तो वह उसे बहुत बुरी यातना देगा।

    18:87
  6. وَأَمَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُ جَزَاءً الْحُسْنَىٰ ۖ وَسَنَقُولُ لَهُ مِنْ أَمْرِنَا يُسْرًا

    परंतु जो ईमान लाया और उसने अच्छा कर्म किया, तो उसके लिए बदले में भलाई है और शीघ्र ही हम उसे अपने काम में से सर्वथा सरलता का आदेश देंगे।

    18:88
  7. ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا

    फिर वह कुछ और सामान लेकर चला।

    18:89
  8. حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَمْ نَجْعَلْ لَهُمْ مِنْ دُونِهَا سِتْرًا

    यहाँ तक कि जब वह सूरज उगने के स्थान पर पहुँचा, तो उसे ऐसे लोगों पर उगता हुआ पाया, जिनके लिए हमने उसके सामने पर्दा नहीं बनाया था।

    18:90
  9. كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا

    मामला ऐसा ही था और उस (ज़ुल-क़रनैन) के पास जो कुछ था, निश्चित रूप से वह हमारे ज्ञान के घेरे में था।

    18:91
  10. ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا

    फिर वह कुछ और सामान लेकर चला।

    18:92
  11. حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ بَيْنَ السَّدَّيْنِ وَجَدَ مِنْ دُونِهِمَا قَوْمًا لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا

    यहाँ तक कि जब वह दो पर्वतों के बीच पहुँचा, तो उन दोनों की उस ओर एक जाति को पाया, जो क़रीब न थी कि कोई बात समझे।

    18:93
  12. قَالُوا يَا ذَا الْقَرْنَيْنِ إِنَّ يَأْجُوجَ وَمَأْجُوجَ مُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ فَهَلْ نَجْعَلُ لَكَ خَرْجًا عَلَىٰ أَنْ تَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ سَدًّا

    उन्होंने कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! निःसंदेह याजूज और माजूज इस भूभाग में उत्पात मचाने वाले हैं। तो क्या हम आपके लिए कुछ राजस्व तय कर दें, इस शर्त पर कि आप हमारे और उनके बीच एक अवरोध बना दें?

    18:94
  13. قَالَ مَا مَكَّنِّي فِيهِ رَبِّي خَيْرٌ فَأَعِينُونِي بِقُوَّةٍ أَجْعَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ رَدْمًا

    उसने कहा : मेरे पालनहार ने जो कुछ मुझे प्रदान किया है, वह उत्तम है। अतः तुम श्रमशक्ति से मेरी सहायता करो, मैं तुम्हारे और उनके बीच एक मोटी (और दृढ़) दीवार बना दूँगा।

    18:95
  14. آتُونِي زُبَرَ الْحَدِيدِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا سَاوَىٰ بَيْنَ الصَّدَفَيْنِ قَالَ انْفُخُوا ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَعَلَهُ نَارًا قَالَ آتُونِي أُفْرِغْ عَلَيْهِ قِطْرًا

    मुझे लोहे के टुकड़े ला दो, यहाँ तक कि जब दोनों पहाड़ों के बीच का हिस्सा ऊपर तक बराबर कर दिया, तो कहा : अब इसमें आग दहकाओ, यहाँ तक कि जब उसे आग कर दिया, तो कहा : मुझे पिघला हुआ ताँबा ला दो, ताकि मैं इसपर उँड़ेल दूँ।

    18:96
  15. فَمَا اسْطَاعُوا أَنْ يَظْهَرُوهُ وَمَا اسْتَطَاعُوا لَهُ نَقْبًا

    फिर उनमें न यह शक्ति रही कि उस पर चढ़ सकें और न वे उसमें कोई छेद कर सके।

    18:97
  16. قَالَ هَٰذَا رَحْمَةٌ مِنْ رَبِّي ۖ فَإِذَا جَاءَ وَعْدُ رَبِّي جَعَلَهُ دَكَّاءَ ۖ وَكَانَ وَعْدُ رَبِّي حَقًّا

    उस (ज़ुलक़रनैन) ने कहा : यह मेरे पालनहार की ओर से एक दया है। फिर जब मेरे पालनहार का वादा आ जाएगा, तो वह इसे पृथ्वी के बराबर कर देगा, और मेरे पालनहार का वादा हमेशा से सच्चा है।

    18:98
  17. وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍ يَمُوجُ فِي بَعْضٍ ۖ وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَجَمَعْنَاهُمْ جَمْعًا

    और उस दिन हम उन्हें इस अवस्था में छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे से मौजों की तरह परस्पर गुत्थम-गुत्था हो जाएँगे और “सूर” फूँक दिया जाएगा, तो हम उन सभी को इकट्ठा करेंगे।

    18:99
  18. وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍ لِلْكَافِرِينَ عَرْضًا

    और उस दिन हम जहन्नम को काफिरों के ठीक सामने कर देंगे।

    18:100
  19. الَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِي غِطَاءٍ عَنْ ذِكْرِي وَكَانُوا لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا

    जिनकी आँखें मेरी याद से पर्दे में थीं और वे सुन ही नहीं सकते थे।

    18:101
  20. أَفَحَسِبَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنْ يَتَّخِذُوا عِبَادِي مِنْ دُونِي أَوْلِيَاءَ ۚ إِنَّا أَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَافِرِينَ نُزُلًا

    तो क्या जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उन्होंने यह सोचा है कि वे मुझे छोड़कर मेरे बंदों को सहायक बना लेंगे? निःसंदेह हमने जहन्नम को काफिरों के लिए आतिथ्य के रूप में तैयार कर रखा है।

    18:102

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी