सूरह 15 अल्-ह़िज्र, आयत 80 – 84

  1. وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ

    तथा निःसंदेह ह़िज्र के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।

    15:80
  2. وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ

    और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।

    15:81
  3. وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ

    और वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।

    15:82
  4. فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ

    अंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।

    15:83
  5. فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ

    फिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।

    15:84

अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari