सूरह 15 अल्-ह़िज्र, आयत 80 – 84
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وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ
तथा निःसंदेह ह़िज्र के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।
15:80 -
وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।
15:81 -
وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ
और वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।
15:82 -
فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
अंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।
15:83 -
فَمَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
फिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।
15:84
अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari